दुर्गा सप्तशती के 13 अध्याय इस प्रकार है

क्या है दुर्गा सप्तशती ??? क्या है इसका महत्व ?? आईये इस पोस्ट के द्वारा इन प्रश्नो के उत्तर जाने |
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दुर्गा सप्तशती के 13 अध्याय - tantra solution

प्रथम अध्याय : इसके पाठ से सभी प्रकार की चिंता दूर होती है एवं शक्तिशाली से शक्तिशाली शत्रु का भी भय दूर होता है शत्रुओं का नाश होता है ।

द्वितीय अध्याय : इसके पाठ से बलवान शत्रु द्वारा घर एवं भूमि पर अधिकार करने एवं किसी भी प्रकार के वाद विवाद आदि में विजय प्राप्त होती है ।

तृतीय अध्याय : तृतीय अध्याय के पाठ से युद्ध एवं मुक़दमे में विजय, शत्रुओं से छुटकारा मिलता है ।

चतुर्थ अध्याय : इस अध्याय के पाठ से धन, सुन्दर जीवन साथी एवं माँ की भक्ति की प्राप्ति होती है ।

पंचम अध्याय : पंचम अध्याय के पाठ से भक्ति मिलती है, भय, बुरे स्वप्नों और भूत प्रेत बाधाओं का निराकरण होता है ।

छठा अध्याय : इस अध्याय के पाठ से समस्त बाधाएं  दूर होती है और समस्त मनवाँछित फलो की प्राप्ति होती है ।

सातवाँ अध्याय : इस अध्याय के पाठ से ह्रदय की समस्त कामना अथवा किसी विशेष गुप्त कामना की पूर्ति होती है ।

आठवाँ अध्याय : अष्टम अध्याय के पाठ से धन लाभ के साथ वशीकरण प्रबल होता है ।

नौवां अध्याय : नवम अध्याय के पाठ से खोये हुए की तलाश में सफलता मिलती है, संपत्ति एवं धन का लाभ भी प्राप्त होता है ।

दसवाँ अधयाय : इस अध्याय के पाठ से गुमशुदा की तलाश होती है, शक्ति और संतान का सुख भी प्राप्त होता है ।

ग्यारहवाँ अध्याय : ग्यारहवें अध्याय के पाठ से किसी भी प्रकार की चिंता,  व्यापार में सफलता एवं सुख-संपत्ति की प्राप्ति होती है ।

बारहवाँ अध्याय : इस अध्याय के पाठ से रोगो से छुटकारा, निर्भयता की प्राप्ति होती है एवं समाज में  मान-सम्मान मिलता है ।

तेरहवां अध्याय : तेरहवें अध्याय के पाठ से माता की भक्ति एवं सभी इच्छित वस्तुओं की प्राप्ति होती है ।

मनुष्य जब तक जीवित है तब तक उसके जीवन में उतार चढ़ाव आते ही रहते है । मनुष्य की इच्छाएं अनंत हुई और इन्ही की पूर्ति के लिए दुर्गा सप्तशती से सुगम और कोई भी मार्ग नहीं है । इसीलिए नवरात्र में विशेष रूप से दुर्गा सप्तशती के तेरह अध्यायों का पाठ करने का विधान है। प्रतिदिन पाठ करने वाले मनुष्य एक दिन में पूरा पाठ न कर पाएं, तो वे एक, दो, एक, चार, दो, एक और दो अध्यायों के क्रम से सात दिनों में पाठ पूरा कर सकते हैं। संपूर्ण दुर्गासप्तशती का पाठ न करने वाले मनुष्य को देवी कवच, अर्गलास्तोत्र, कीलकम का पाठ करके देवी सूक्तम को अवश्य ही पड़ना चाहिए।

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